आज एक ओर वीर शहीद हो गया लेकिन हमें क्या ?

एक और #शहीद हो गया पर हमें क्या?

किसी की जान जाए कोई पहरेदार वतन का बर्बरता के साथ मारा जाए हमें क्या फर्क पड़ता है?थोड़ी सी देर मन दुखी होता है !फिर अगला पल इस ओर से ध्यान दूसरी तरफ घुमा देगा! कल सीमा पर बहुत भारतीय सैनिक के साथ बर्बरता कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने बहुत बर्बरता की  उसकी आंखें निकाल ली उसके शरीर कई अंगों को काट दिया गया बहुत दुख होता है!

पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने, आयात निर्यात करने, की नीति या खेल सांझा, करने को बढ़ावा देने वाले लोग! इनको शायद इस बात का फर्क नहीं पड़ता यह केवल इंटरनेशनल लेवल पर अपनी इज्जत,बरकरार रखने के लिए इस देश के गरीब घरों के बेटों को ऐसे ही बर्बरतापूर्वक मरवाते रहेंगे पर हमें क्या?

कल एक तरफ पूरा देश पाकिस्तान के साथ बैठकर क्रिकेट का मज़ा ले रहा था! जिस वक्त पाकिस्तान के साथ मैच शुरू हुआ, उस वक्त शहीद नरेंद्र सिंह के साथ में उसकी जिंदगी का मैच शुरू हो गया इधर टॉस उछाला जा रहा था उधर प्राणों को निकाला जा रहा था!

पाकिस्तान के साथ मैच में पाकिस्तानियों की भारतीय गेंदबाज गिल्लियां उखाड़ रहे थे इधर पाकिस्तानी रेंजर नरेंद्र के हाथों के नाखून उखाड़ रहे थे! पाकिस्तान की टीम थोड़े से रनों पर सिमट रही थी! उधर नरेंद्र की जिंदगी सिमट रही थी!

इधर भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तानियों को पवेलियन की तरफ निकाल दिया! उधर पाकिस्तानी रेंजर्स ने शहीद नरेंद्र की आंखों को निकाल दिया! क्रिकेट का मैच भारत ने जीता लोगों ने ताली बजाई पटाखे फोड़े लोगों ने सोचा  भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया !लेकिन वह गलत सोच रहे हैं,असल में पाकिस्तान ने भारत को हरा दिया  उसका बेटा छीन कर!

कितना मार्मिक और खौफनाक मंजर होगा सोच कर भी दर्द होता है!लिखने की ताकत खत्म होने लगी है अब शहीदों के बारे में!उसके घर में शांति थी किसी को पता नहीं था कि उनके घर के बेटे भाई पिता के साथ क्या हो रहा है सब  अपने अपने  कामों में व्यस्त हैं !दैनिक कार्य कर रहे थे कोई सोने की तैयारी  कोई पढ़ाई कोई कुछ तो कोई कुछ!पर एक तरफ उनका वह परिवार का सदस्य है!जो पूरे परिवार का बोझ लिए पाकिस्तानियों की बर्बरता को झेल रहा था! 

काश इस देश के एलीट क्लास लोग नेता अधिकारी या सामान्य लोग उन शहीदों के परिवारों के सदस्य की तरह होकर यह समझ पाए, कि जिनके साथ ऐसी यातनाएं ऐसी घटनाएं ऐसी बर्बरता होती है! तो उन शहीदों के परिवारों पर क्या हुआ गुजरती होगी! उनके मन की पीड़ा को समझ पाए पर किसी को क्या फर्क पड़ता है?

शहीद होने वाला अकेला शहीद नहीं होता,उसके साथ पूरा तंत्र शहीद हो जाता है! उसके परिवार भी शहीद हो जाते हैं! उसके बच्चों के सपने शहीद हो जाते है उसके घर का गुजारा शहीद हो जाता है! उसका बूढ़ा बाप शहीद हो जाती है!उसकी बूढ़ी मां और साथ में शहीद हो जाती है जिंदगी भर की उस शहीद की पत्नी की जरूरतें !

शहीद का परिवार दर बदर की ठोकरें खाता है,लड़ता है अपने हकों की लड़ाई, सरकारी दफ्तरों की चौखट पर,
उसके बावजूद क्या मिल पाता है? थोड़ी सी मीडिया अटेंशन थोड़ी सी सांत्वना एक प्रतिमा गांव में, यह शहीद होने वाले लगभग गांव के गरीब किसानों के बेटे हैं!इनका दर्द वही जानते हैं, जो इनके आसपास से होते हैं !

मैंने कई बार ऐसा महसूस किया है!और मैं कई शहीदों की अंतिम यात्रा में शामिल भी हुआ हूं! मैंने जो प्रलाप और जो दुख उन परिवारों का देखा है!वह बहुत ही असहनीय होता है उसके बारे में शब्द कम पड़ जाते हैं!

मैं यह जानता हूं, इस पोस्ट की उम्र केवल 2 घंटे से ज्यादा नहीं है! और अफसोस करता हूँ, कि मैं ऐसे लोगों के लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूं!जो शहीद हो रहे हैं,सब भुला दिए जाते हैं! फिर कोई नया मुद्दा उठा दिया जाता है! इस मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए अब हम किसी को कोसने की ताकत को भी खत्म कर चुके हैं!अब हमारे शब्दों में दर्द के सिवा और कुछ नहीं है!

मैं शहीद को शत शत नमन करता हूं उसको पैदा करने वाली माता का आभारी हूं!जिसने ऐसे वीर बहादुर बेटे को जन्म दिया! उसके पूरे परिवार का शुक्रगुजार हूं!परंतु लाख लानत भेजता हूं! सरकारों को जो केवल मुद्दों को जिंदा रख कर राजनीति के चक्कर में इस किस्से को खत्म नहीं करती!

इस देश का पता नहीं लेकिन मैं आपका हमेशा कर्जदार रहूंगा! क्योंकि आपने मेरे लिए सरहद पर पहरा दिया है! ताकि मैं आराम से अपने घर में सो सकूं 🙏

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